Vidhata

पोंगल: तमिल 4-दिवसीय फसल त्योहार, समझाया गया

पोंगल तमिलनाडु का 4-दिवसीय फसल त्योहार है जो मकर संक्रांति से शुरू होता है। हर दिन एक अलग देवता का सम्मान करता है।

PCPandita Chitralekha· KP, Lal Kitab, daily Pandit guidance
··6 min read
In this article
  1. पोंगल के 4 दिन
  2. "उफान" अनुष्ठान
  3. मकर संक्रांति पर ही क्यों
  4. मट्टू पोंगल — गाय का उत्सव
  5. ग़ैर-तमिल परिवारों के लिए व्यावहारिक पालन
  6. गहरा अर्थ

पोंगल के 4 दिन

पोंगल 4 दिनों में मनाया जाता है, मकर संक्रांति (14 या 15 जनवरी) से शुरू। हर दिन का विशिष्ट देवता और अनुष्ठान:

दिन 1 — भोगी पोंगल: सफ़ाई, पुरानी वस्तुओं को त्यागना, अनचाही चीज़ों की होली। इंद्र को वर्षा के देवता के रूप में सम्मानित।

दिन 2 — सूर्य पोंगल (तई पोंगल): मुख्य त्योहार दिन। नए बर्तन में दूध और गुड़ के साथ ताज़ा चावल बाहर पकाया जाता है, जब तक उबल कर बहता है — यह उफान शुभ "पोंगल" है (शाब्दिक "उबलना")। सूर्य पूजा।

दिन 3 — मट्टू पोंगल: पशु पूजा। गायों और बैलों को नहलाया जाता है, फूलों और घंटियों से सजाया जाता है, पोंगल खिलाया जाता है।

दिन 4 — कानुम पोंगल: "कानुम" का अर्थ "देखना"। पारिवारिक भेंट, आदान-प्रदान, पिकनिक।

"उफान" अनुष्ठान

दिन 2 का हस्ताक्षर अनुष्ठान पोंगल (गुड़ और दूध के साथ मीठा चावल) तैयार करना है — एक नए मिट्टी के बर्तन में, बाहर, सुबह की धूप में।

सटीक निर्देश: पोंगल को तब तक पकाएँ जब तक चावल + दूध बर्तन से बाहर बहे। उफान शुभ क्षण है — समृद्धि, ख़ुशी का प्रतीक।

परिवार खड़े होकर देखता है, उफान के क्षण पर "पोंगलो पोंगल!" चिल्लाते हैं, फिर सब को परोसा जाता है।

मकर संक्रांति पर ही क्यों

मकर संक्रांति = सूर्य का मकर में प्रवेश = उत्तरायण की शुरुआत (शुभ 6 उत्तरी महीने)। तमिल परंपरा इस सटीक क्षण को फसल के मौसम की शुरुआत मानती है।

वर्ष की पहली फसल — आमतौर पर चावल — इस दिन सूर्य को अर्पित की जाती है। पोंगल व्यंजन इसी ताज़ा-कटे चावल से बनता है।

मट्टू पोंगल — गाय का उत्सव

दिन 3 की पशु पूजा हिंदू धर्म में सबसे विशिष्ट प्रथाओं में से एक है। गायों को धोया जाता है, उनके सींग चमकीले रंगों से रंगे जाते हैं, गले में मालाएँ, पैरों में घंटियाँ। उन्हें पोंगल के कटोरे पहले खिलाए जाते हैं (परिवार के खाने से पहले)।

ग़ैर-तमिल परिवारों के लिए व्यावहारिक पालन

यदि आप तमिल नहीं हैं पर त्योहार की भावना सम्मानित करना चाहते हैं:

दिन 1 (भोगी): घर अच्छी तरह साफ़ करें। अनुपयोगी वस्तुएँ त्यागें। सूर्यास्त पर एक दीप जलाएँ।

दिन 2 (तई पोंगल): सूर्योदय से पहले उठें। सूर्योदय पर पूर्व मुख खड़े हों; जल और "ॐ सूर्याय नमः" मंत्र अर्पित करें। नाश्ते के लिए मीठा चावल का व्यंजन (गुड़ और दूध के साथ) पकाएँ।

दिन 3 (मट्टू पोंगल): यदि सुलभ हो तो गोशाला जाएँ। यदि नहीं, ऑनलाइन या किसी पशु संगठन को दान करें।

दिन 4 (कानुम पोंगल): परिवार के साथ विस्तृत समय बिताएँ — पिकनिक, लंबा भोजन, साथ में सैर।

गहरा अर्थ

पोंगल सिखाता है: कृतज्ञता संकेंद्रित वृत्तों में बहती है। ब्रह्मांड को (सूर्य, दिन 2), काम करने वाले पशुओं को (दिन 3), परिवार और समुदाय को (दिन 4), पहले सफ़ाई के साथ (दिन 1) ताकि कृतज्ञता साफ़ उतरे।

अधिकांश आधुनिक त्योहारों ने यह स्तरित नीयत खो दी है। पोंगल, ठीक से रखा गया, उन कुछ में से एक है जो इसे बनाए रखता है।

Continue reading

Related articles